सादर अभिनन्दन...


सादर अभिनन्दन...

Monday, November 07, 2011

अब तो...

अब तो उस ज़ालिम ने ख्वाबों में भी आना छोड़ दिया,
मै पागल  अब  भी  मगर  उसका  इंतज़ार  करता हूँ !!

Wednesday, November 02, 2011

भूला नहीं पाओगे मुझे...

अपने व्यक्तित्व पर मुझको इतना यकीन तो अब भी है,
तुम छोड़ तो सकते हो मगर भुला नहीं पाओगे मुझे...!!

Tuesday, November 01, 2011

बचपन...

आज भी जब,
ज़माना बचपन का
याद आता है,
मुस्कराहट...
    लबों पर
दर्द...
    आँखों में
उतर आता है,
दर्द...
    वक़्त बीत जाने का,
मुस्कराहट...
    यादों के आ जाने से...

Tuesday, October 25, 2011

ज्योति-पर्व की सप्रेम शुभकामनाएं...

आइये सब मिल कर,
छोटा सा ही सही,
केवल एक ही मगर...
स्नेह का, प्रेम का, सौहार्द का
दीप जलाएं...
द्वेष को मिटाए, मित्रता बढ़ाये
एक ऐसा दीप जलाएं...
ज्योति-पर्व की सप्रेम शुभकामनाएं...

Monday, October 24, 2011

गाँव हूँ मैं...


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"गाँव रोमांटिक है
ट्रेन की खिड़की से मगर...
हकीकत के कागज पर
तस्वीर  कुछ अलग ही है...
पधारो, आओ..."
आओ खींचो तस्वीरें,
लिखो खुद के अल्फाजों को...
मेरी नियति है बस
गाँव हूँ मैं तुम्हारा शहर नहीं...
पिछड़ा हूँ पर मरा नहीं,
तुम्हारी तरह..."
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